
गम्हरिया : (सरायकेला-खरसावां ):स्वच्छ भारत और साफ-सुथरे प्रशासन के दावे कागजों और भाषणों में भले ही दमदार लगते हों, लेकिन जब हकीकत की जमीन पर कदम रखा जाए तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है। गम्हरिया प्रखंड सह अंचल कार्यालय इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां का शौचालय आज बदहाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।जमीनी सच्चाई: शौचालय में घुसना तक मुश्किलजब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो शौचालय की स्थिति देखकर हैरानी होना लाजिमी था। चारों तरफ फैली गंदगी, असहनीय दुर्गंध और सफाई का पूरी तरह अभाव—यह सब कुछ इस बात का संकेत देता है कि यहां नियमित सफाई की व्यवस्था या तो है ही नहीं या फिर पूरी तरह फेल हो चुकी है।यह वही जगह है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग अपने काम से आते हैं, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधा भी साफ-सुथरी नहीं मिल पा रही।कागजों में स्वच्छता, जमीन पर गंदगीएक ओर प्रशासन स्वच्छता अभियान के नाम पर जागरूकता फैलाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपने ही कार्यालय परिसर के शौचालय की यह हालत कई गंभीर सवाल खड़े करती है।क्या स्वच्छता केवल पोस्टर और नारों तक सीमित रह गई है?जिम्मेदारी से बचते अधिकारी?सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?क्या प्रखंड प्रशासन को इस समस्या की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है? अगर बजट आवंटित होता है, तो वह खर्च कहां हो रहा है?जनता में नाराजगी, कार्रवाई की मांगकार्यालय आने वाले लोगों में इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का साफ कहना है कि जब सरकारी दफ्तरों की ही यह हालत है, तो आम जगहों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या गम्हरिया प्रखंड कार्यालय की इस बदहाल व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
