
नई दिल्ली | देश की सर्वोच्च अदालत ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST (अनुसूचित जाति/जनजाति) से जुड़े कानूनी प्रावधानों का लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। इस फैसले के बाद कानूनी और सामाजिक स्तर पर बड़ी बहस छिड़ गई है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि SC/ST की पहचान मूल रूप से सामाजिक उत्पीड़न और ऐतिहासिक भेदभाव से जुड़ी है, जो विशेष रूप से हिंदू सामाजिक व्यवस्था से संबंधित रहा है।
ऐसे में यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे यह साबित करना होगा कि वह अब भी उसी प्रकार के सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न का सामना कर रहा है।
SC/ST एक्ट पर क्या असर?
इस फैसले के अनुसार:
धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज करना स्वतः संभव नहीं होगा
लाभ पाने के लिए व्यक्ति को अपनी सामाजिक स्थिति और उत्पीड़न साबित करना होगा
हर मामले को तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर परखा जाएगा
क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि:
यह धर्म और सामाजिक पहचान के संबंध को स्पष्ट करता है
SC/ST एक्ट के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में भी इसे अहम कदम माना जा रहा है
साथ ही, वास्तविक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया गया है
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आने वाले समय में कई मामलों में मिसाल (precedent) बनेगा और निचली अदालतें इसी आधार पर निर्णय लेंगी।
